ईश्वर

ईश्वर, गॉड, अल्लाह, ताओ, परमात्मा या परमेश्वर का अर्थ उस अज्ञात सत्ता से है जो सृष्टि के सृजन और संचालन के पीछे काम रही है. प्रकृति उसकी कार्यशक्ति का ही दूसरा नाम है. ईश्वर अविनाशी, सत्यस्वरूप, सर्वव्यपाक और शक्तिमान है. संसार एक पर्दा है जिसके पीछे वह छिपा हुवा है और उसके सास्वत नियम अपनी तरह से काम कर रहे है. ईश्वर कर्मफ़लदता है. वह सबका पिता, माता, मित्र और स्वामी है.

 

बुद्ध और महावीर ने परमात्मन को सत्य और करूणा के रूप में देखा था. संसार की सब वस्तुओं और बिन्दुओं पर ईश्वर का शासन है, जबकि मनुष्य कर्म करने में लगभग स्वतंत्र है परन्तु, कर्मफल भोगने में ईस्वरीय व्यवस्था के नीचे परतंत्र है. कर्म करने की स्वतंत्रा का दुरुपयोग करके ही मनुष्य पाप करता है जिनके लिए वह स्वयं जिम्मेदार होता है. जो जैसा बोयेगा, वैसा काटेगा और करेगा, वैसा भरेगा।

 

मनुष्य ईश्वर की सर्वश्रेष्ठ कृति है, परन्तु उसका ज्ञान अधूरा और सीमित है. परमात्मा असीमित है. ईश्वर को न मानना या उसे अलग-अलग मानकर एक-दूसरे से बेगानेपन का व्यवहार करना मनुष्य की संकीर्णता और अधूरेपन की निशानी है. सभी जीव-जंतु ईश्वर की सृस्टि है और मनुष्य मात्र उसकी संतान और भाई-भाई हैं, इसलिए सबको आपस में भाई-भाई और भाई-बहनों की तरह प्रेम से मिलजुल कर रहना चाहिए।

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