आत्मा,परमात्मा और जीवात्मा

आत्मा का अर्थ विश्वात्मा से है, जिसे हम सार्वभौम आत्मा या परमात्मा कह सकते हैं. विश्वात्मा एक ही है जिसके प्रकाश से सब प्रकाशित हैं और जिसके अस्तित्व से ही सबका अस्तित्व है. विश्वात्मा या सार्वभौम आत्मा का दूसरा नाम ब्रह्म है. ब्रह्म, ब्रह्मांड की आत्मा का ही दूसरा नाम है जो सर्वव्यापक है परंतु जीवात्माएं अलग-अलग इकाइयों में है और अपने शुभ-अशुभ कर्मों के लिए जिम्मेदार हैं. जीवात्मा कब कर्म करने के लिए स्वतंत्र है जबकि कर्मफल के भोग के लिए वह परमात्मा की व्यवस्था में परतंत्र है शाहरुख आत्मा सार्वभौम आत्मा यह ब्रह्म को मानव की भौतिक आंखें साधारण नहीं साधारणतया नहीं देख सकती उसे अनुभव किया जा सकता है यह हृदय की आंखों से देखा जा सकता है परंतु भौतिक शरीर के नष्ट होने के बाद विशेष परिस्थितियों में या विशेष परिस्थितियां पैदा करके मानव की भौतिक आंखें भी जीवात्मा को देख सकती है जीवात्मा पर लेखक की लंबी शोध के परिणाम स्वरूप या माना है कि भौतिक शरीर के नष्ट होने अथवा मृत्यु के बाद और पुनर्जन्म से पूर्व जीव आत्माओं को अपने पिछले भौतिक शरीर की स्मृति भूख प्यास विविध लालसा एवं रचनाएं तथा सुख दुख से प्रभावित होते हुए छाया शरीर में देखा जा सकता है हवाओं ने देखा जाता रहा है जबकि जीवात्मा कथित कमजोरियों से प्रभावित रहने वाला एक रस तथा सर्व व्यापक तत्व है.

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