अस्तेय

 

अस्तेय का अर्थ है चोरी ना करना। किसी दूसरे की संपत्ति या किसी भी चीज का उपयोग स्वामी से बिना पूछे न करना अस्तेय है। अस्तेय की माँ का नाम ईमानदारी है और बाप का नाम सत्य है। अस्तेय को विरासत में संपूर्ण सद्गुण अपने मां बाप से मिले हैं और मां बेटे के स्वभाव में साम्य है।

 

अस्तेय के शासन में ताले-चाबी का उपयोग नहीं होता और अस्तेय के राज में चोरी करने के काम से सबको नफरत है। अस्तेय नेकी के रास्ते पर चलता है और अस्तेय की बिरादरी किसी को धोखा नहीं देती। अस्तेय के कार्यक्रमों का प्रत्येक क्षण स्वर्ग की तरफ आगे बढ़ने वाला एक कदम है। अस्तेय की रोकड़ में एक और दो नंबर का भेद नहीं है।

 

अस्तेय के बाजार माल से भरे-पूरे हैं, परंतु दुकानों पर स्वामी और नौकर नहीं है। मूल्य-सूची देखकर लोग पैसे तिजोरियों में डालते जा रहे हैं और चाहा गया सामान उठा कर लेते जा रहे हैं। मेरे प्यारे अस्तेय ! आबाद रहो, तुम ने कलयुग में भी सतयुग को बुलवा लिया है और नरक का महकमा उठाकर स्वर्ग का दरवाजा सबके लिए खुला कर दिया है।

 

मैंने सोचा था कि आप की हुकूमत में शायद गरीब और अमीर के बीच में आरक्षण हो, लेकिन मालूम हुआ कि आप गंदी राजनीति से ऊपर उठ चुके हैं और आपने बिना किसी भेदभाव के गरीब और अमीर के लिए स्वर्ग का फाटक खोल रखा है।

 

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