मन मानव की सभी शक्तियों का केंद्र बिंदु और व्यक्तित्व का दर्पण है। मन की शक्तियां विलक्षण और अपार हैं। मनुष्य का सुख-दुख, बंधन और मोक्ष मन के ही अधीन है। मन एक क्षेत्र है। पुण्य और पाप के बीज मन में ही बोए जाते हैं। जैसा बोएगा वैसा काटेगा ही। मनुष्य अपने मन को पवित्र बना कर देवत्व प्राप्त कर सकता है और बंधन मुक्त भी हो सकता है।
जीवन में किसी भी सफलता को पाने के लिए मानसिक शक्तियों का अपरिहार्य महत्व है। स्वच्छ मन मानव जीवन की सबसे बड़ी संपदा है। मन की मलिनता प्रगति के द्वार बंद कर देती है। नैतिक आदर्शों का पालन शरीर के प्रतिबंधों पर नहीं अपितु मन के उच्च स्थिति पर निर्भर है। जीवन के उत्थान और पतन का केंद्र मन ही है।
दर्पण की तरह अपने मन को स्वच्छ रखो ताकि वह आपको बुराई से बचाकर आश्चर्यजनक क्षमताएं दे सके। मन आपका घर है जहां सुख-शांति का खजाना भरा पड़ा है। शुद्ध मन ही ईश्वर का सानिध्य प्राप्त कर सकता है और शाश्वत सुख की अनुभूति करवा सकता है। पवित्र मन में विलक्षण शक्तियों का भंडार भरा जा सकता है और वह टिक सकता है।
नियमित सत्कर्म से बर्तनों की शुद्धि की तरह ही उसको साफ रखो जा सकता है। सत्कर्म वह मंजन है जिससे मन एवं जीवात्मा का रत्न चमकाया जा सकता है।



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